Friday, July 24, 2009
चिर दे नभ , आज बादलों की सेर तू कर
पता है मंजिले , राह अनजान है
पर चलते ही रहना बस तेरी शान है ,
डगमगाते क़दमों को थाम न तू
मुश्किलों से झूझना तेरी पहचान है ,
अनजानी राहों के चेहरे तो देख
नए भी नही , न ही अनजान है,
तो कदम से मिला कदम बस देर न कर
चिर दे नभ ;
आज बादलों की सेर तू कर |
हर मोड़ पे मुश्किलें है यहाँ राह में
जिनसे डरना नही ये तेरा काम है ,
थम ज़रा मुस्कुरा अब अपनी राह तो देख
मुश्किलें हार नही जीत का पैगाम है ,
है धरती तेरी और नभ भी तेरा
मुस्कुराते पुष्प ,लहरहा उठी है धरा,
सोच मैं जीत है सोच मैं हार है
सोचो तो पतझड़ भी सावन की बहार है ,
बदल दे आंसुओ को होठों की मुस्कान में
पसार पंख नील गगन की शीतल बयार में ,
सोच मत बस संग्राम में तू उतर
चिर दे नभ ,
आज बादलों की सेर तू कर |
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