Monday, August 1, 2011

रेलगाड़ी


छुक छुक आती रेलगाड़ी
छुक छुक जाती रेलगाड़ी
बड़ी लगन से एक राह में बदती जाती रेलगाड़ी
सर्दी गर्मी आंधी तूफान
एक दिशा में चलती रहती
मंजिल पाने को जो बढती
रुके रुकाये भी ना रूकती
पर जब मंजिल पा जाती वो
छुक छुक करती बढ जाती वो
पाना जो है अगली मंजिल
पाना जो है अगली मंजिल

2 comments:

Gaurav Gupta said...

Simple words, simple example yet it perfectly conveys the message...awesome buddy :)

कुमार ध्रुव said...

thanks :)